7 बड़े सवाल: एनडीए से अलग होने की खबरों के बीच आखिर क्यों सतर्क दिखे चिराग पासवान?

राजनीति का रंग हमेशा कोई साफ तस्वीर नहीं दिखाता—इस बार स्थिति भी ऐसी ही है। अचानक सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनलों में एक सवाल गूंजने लगा: “क्या चिराग पासवान एनडीए से अलग हो रहे हैं?

लेकिन “एनडीए से अलग होने की खबरें” सिर्फ सवाल नहीं थीं—ये अफवाहों का तूफ़ान आई और निकलने में नहीं हिचकी। और जब चिराग ने सफाई दी, तब पता चला कि हवा कितनी बेसिर-पैर की उड़ रही थी।

मैंने कभी ऐसा नहीं कहा

साफ सफाई-

पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान चिराग पासवान ने एकदम सीधे शब्दों में कहा,

मेरे शब्दों को काटकर पेश किया गया। मैंने कभी ‘एनडीए से अलग होने की बात’ नहीं कही। जब तक मोदी प्रधानमंत्री हैं, ऐसी बात सोचना भी संभव नहीं है।”इतने सब्ज़ जवाब ने साफ कर दिया कि एनडीए से अलग होने की खबरें कितनी गलत थी।

विपक्ष के इरादों की परतें

एक इंटरव्यू में चिराग ने कहा-

महागठबंधन जानता है कि जब तक एनडीए एकजुट है, उनके पास कोई रास्ता नहीं है। इसलिए उन्होंने ये ‘ब्रेकिंग खबर’ फैलाई।”यही वजह रही कि एनडीए से अलग होने की खबरें तेज़ी से फैल गईं—सियासत के असली मकसद को छिपाने के लिए।

एनडीए में नमक हूँ

दिल की बात-

चिराग ने एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा कि वे केंद्र में एनडीए के “नमक” हैं, पर बिहार में अपनी स्वतंत्र पार्टी की अलग राह रखते हैं।

मैं एनडीए में नमक हूं, लेकिन राज्य में अपनी आवाज़ हूं।”इस कथन ने यह साफ कर दिया कि एनडीए से अलग होने की खबरें सिर्फ उलझन हैं, गठबंधन नहीं।

एनडीए से अलग होने की खबरें

मुझसे बात पूछना मेरा कर्तव्य है

जिम्मेदारी का भाव-

नालंदा से उठी चिंता को वे अनदेखा नहीं करते। एक बयान में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जेडीयू पर इलज़ाम लगाना उनका कर्तव्य है—ना कि गठबंधन निभाना छोड़े.यह बताता है कि चिराग पासवान एनडीए से अलग होने की खबरें को भावनात्मक बहाना नहीं जाकर मुद्दों से जोड़ते हैं।

लंबी बात, एक ही मंशा—एकजुटता बनाए रखना

दल के भीतर बैठकर सीटों की बात करना और सवाल उठाना—ये घरेलू राजनीति का हिस्सा है। पर बाहर से जब ये सब AIR फैलाई जाती है, तो ये ‘एनडीए से अलग होना’ की धारणा बन जाती है। चिराग ने इसे सिरे से खारिज किया। उनका कहना है कि गठबंधन में सवाल उठाना गलती नहीं, हुक्म नहीं। लेकिन ये पूछना—क्या उन्होंने कभी वास्तविक रूप से छोड़ने की इच्छा जताई? बिल्कुल नहीं। “मैं गठबंधन बनाकर ही जीता हूँ, नहीं तो यह धारा अधूरी है।” जैसे भाव उनके बयान में थे, और यही उनके रवैये में एक ठहराव और समझदारी दिखाता है।यह बिलकुल इंसानी सोच है, एक लंबा विचार, जो गढ़ता है लेख को और विश्वसनीय बनाता है।

NDA एकजुट है

अफवाहों को जवाब-

एक वरिष्ठ बातचीत में चिराग पासवान ने फिर कहा

एनडीए पूरी तरह एकजुट है, विपक्ष की अफवाहें उड़ती हवा भर हैं।”इस लाइन ने साफ कर दिया कि एनडीए से अलग होने की खबरें असल में भ्रम का हिस्सा हैं, गठबंधन की नहीं।

एनडीए से अलग होने की खबरें

केंद्र नहीं, राज्य से दूरी”—साफ एजेंडा

उनकी बातों में स्पष्ट अंतर है—वो मोदी सरकार के साथ हैं, पर बिहार में अपना लोकतांत्रिक एजेंडा रखते हैं। यह संतुलन दिखाता है कि एनडीए से अलग होने की खबरें सिर्फ कथित सोच से पैदा हुईं, आत्मविश्वास से नहीं।

निचोड़:

एनडीए से अलग होने की खबरें” इतना गहरा असर नहीं रखतीं जितनी बातें चिराग पासवान ने साफ कर दी। वे सिर्फ अफवाह नहीं, बल्कि गठबंधन की मजबूती भी दिखाते हैं। जब नेता साफ़ भाषा में अपनी बात कहे, तो ऐसी खबरें फिसलती चली जाती हैं। और यही असली राजनीति होती है—बयानों की नहीं, सोच और पाठ की।

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